तिरंगा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति: आजीविका और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान..



     बिहार के औरंगाबाद जिले में, हसपुरा प्रखंड के शांत और हरे-भरे परिदृश्य में एक अनोखी पहल ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई ऊर्जा का संचार किया है। यह पहल है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत स्थापित कम्युनिटी मैनेज्ड ट्रेनिंग सेंटर (CMTC) की, जिसका संचालन तिरंगा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड की देख-रेख में किया जा रहा है। जून 2024 में शुरू हुआ यह केंद्र, न केवल एक प्रशिक्षण स्थल है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामुदायिक सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बन गया है।

एक सपना जो साकार हुआ..

इस केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट था - स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्यों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को उनके कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए एक स्थानीय और सुलभ मंच प्रदान करना। अब तक प्रशिक्षण के लिए औरंगाबाद जैसे बड़े शहरों पर निर्भर रहने वाली जीविका दीदियों के लिए यह केंद्र एक वरदान साबित हुआ है। एक समय था जब उन्हें प्रशिक्षण के लिए अपने घर से 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के होटलों में जाना पड़ता था, जो न सिर्फ असुविधाजनक था, बल्कि उनके लिए अतिरिक्त बोझ भी था। अब हसपुरा में ही प्रशिक्षण केंद्र खुल जाने से उनकी यात्रा का समय और खर्च दोनों बच गया है। जैसा कि एक प्रशिक्षित दीदी ने बताया, "पहले औरंगाबाद जाना पड़ता था, बहुत परेशानी होती थी। अब हमारे ही प्रखंड में यह केंद्र खुल गया है तो आने-जाने में सुविधा है और प्रशिक्षण का माहौल भी बहुत अच्छा लगता है।"

संचालन का मॉडल: एक सामुदायिक प्रयास..

यह केंद्र सिर्फ एक सरकारी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक सामुदायिक प्रयास का बेहतरीन मॉडल है। इसका संचालन मॉडल संकुल संघ की निगरानी में होता है, जो इसे पूरी तरह से 'जीविका' द्वारा संचालित बनाता है। केंद्र में 10 जीविका दीदियां काम करती हैं, जो स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। ये महिलाएं प्रतिदिन ₹250 की राशि और पौष्टिक भोजन प्राप्त करती हैं। उनका मुख्य काम प्रशिक्षणार्थियों के लिए भोजन तैयार करना है, जिसे सभी बहुत पसंद करते हैं। प्रशिक्षणार्थियों के अनुसार, "यहां का खाना सबसे अच्छा है।"
केंद्र के सुचारु संचालन के लिए एक प्रबंधन कमेटी भी है, जो संकुल संघ के सहयोग से काम करती है। इसके अलावा, तिरंगा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति के क्लस्टर फैसिलिटेटर, एरिया कोऑर्डिनेटर और कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर भी इस केंद्र को सफल बनाने में लगातार सहयोग देते हैं।

सफलता की एक झलक..

स्थापना के बाद से, यह केंद्र लगातार प्रगति कर रहा है। जून 2024 से अब तक, 20 से अधिक प्रशिक्षण यूनिट सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। ये प्रशिक्षण विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

 * जीविकोपार्जन में सुधार: महिलाओं को उनके आर्थिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए कौशल विकास पर ध्यान दिया जाता है।
 * सामुदायिक आधारित संगठनों का संचालन और प्रबंधन: स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संगठनों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए नेतृत्व और प्रबंधन क्षमताएं विकसित की जाती हैं।
 * स्वास्थ्य और पोषण: स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और पोषण के महत्व पर प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनके परिवारों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
 * आत्मविश्वास निर्माण: ये प्रशिक्षण सिर्फ कौशल ही नहीं सिखाते, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी बढ़ाते हैं, जिससे वे समाज में एक सशक्त भूमिका निभा सकें।
इस केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपनी दक्षता साबित करते हुए ₹2 लाख का शुद्ध लाभ कमाया है। यह दर्शाता है कि एक सामुदायिक पहल न केवल सामाजिक बदलाव ला सकती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर हो सकती है। NRLM द्वारा केंद्र के लिए दिए गए ₹8,50,000 की शुरुआती राशि का उपयोग प्रशिक्षण से संबंधित सामग्री खरीदने के लिए किया गया था, जिसने इस सफलता की नींव रखी।

भविष्य की ओर बढ़ता कदम..

फिलहाल, यह केंद्र एक निजी मकान में चल रहा है, जिसमें एक बड़ा हॉल, तीन कमरे और चार वॉशरूम हैं, जो आवासीय और गैर-आवासीय दोनों तरह के प्रशिक्षणों के लिए उपयुक्त हैं। हसपुरा के अलावा, दाउदनगर, ओबरा और रफीगंज जैसे प्रखंडों की जीविका दीदियां और सामुदायिक कार्यकर्ता भी यहां प्रशिक्षण लेने आते हैं।

यह केंद्र सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि जीविका दीदियों के सपनों को साकार करने का एक मंच है। यह दिखाता है कि जब समुदाय खुद अपनी जिम्मेदारी लेता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। तिरंगा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड का यह प्रयास वास्तव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की भावना का प्रतीक है, जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान का जीवन जीने के लिए सशक्त बनाता है। यह सफलता की कहानी औरंगाबाद के हसपुरा से शुरू होकर, पूरे बिहार और देश के लिए एक प्रेरणा बन रही है।


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